सहचर है समय

रामदरश मिश्र की काव्य रचनाएँ

Author

रामदरश मिश्र

Year of Issue

2014

Publication Name

परमेश्वरी प्रकाशन

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सहचर है समय

Description

सहचर है समय रामदरश मिश्र का समय को सहचर मानना प्रकारांतर से 'स्व' और 'समय' के संबंधों की द्वंद्वात्मकता और सामंजस्य की ओर संकेत करता है । इस आत्मवृत्त से एक ओर कछार के अंचल में बीते बचपन से लेकर वाराणसी में उच्च शिक्षा, जीविका-संघर्ष, गुजरात-प्रवास, दिल्ली- आगमन, बहुआयामी रचनाशीलता और दिल्ली के साहित्यिक परिवेश से जुड़े मार्मिक प्रसंगों का जुलूस उमड़ पड़ा है, दूसरी ओर इसी के समानांतर स्वतंत्रता-पूर्व का ग्रामीण परिवेश, स्वतंत्रता और जनतांत्रिक आकांक्षाएँ, व्यवस्था के अंतर्विरोध, अध्यापन-जगत की राजनीति, भारत-पाक युद्ध, आपातकाल, इंदिरा गाँधी का निधन, सिख-विरोधी हिंसा यानी कि पचास वर्षों का जीवंत इतिहास अपनी अनेक विशेषताओं और कुरूपताओं के साथ उभरा है ।