· मेरा लेखन ·
हिंदी के यशस्वी कवि रामदरश मिश्र की काव्य-यात्रा — सहज शब्दों में गहरे अर्थ, समय और प्रकृति के बीच बहती हुई अनगिनत संवेदनाएँ।
रामदरश मिश्र का यह तीसरा गजल संग्रह है | जिसमें भाषा और कथ्य दोनों में इतनी विविधता है की कोई कह ही
मिश्र जी की इन गज़लों में भाषा और कथ्य दोनों में इतनी विविधता है जो कहीं देखने को नहीं मिलती |
मिश्र जी की इन गज़लों में भाषा और कथ्य दोनों में इतनी विविधता है जो कहीं देखने को नहीं मिलती की कोई
यह मिश्र जी की चुनी हुई गज़लों का संग्रह है | जीसे ओम निश्चल ने संपादित किया है |
मिश्र जी की गजलगोई बेजोड़ है जिसका मुकाबला हिन्दी साहित्य में तो क्या विश्व साहित्य में भी उपलब्ध
यह मिश्र जी का नवीनतम गजल संग्रह है | जिसमें भाषा और कथ्य दोनों में इतनी विविधता है की कोई कह ही नह
लीक से हटकर लिखने वाले मिश्र जी की गजलें भी लीक से हटकर ही होती हैं |