हिन्दी उपन्यास के सौ वर्ष

रामदरश मिश्र की काव्य रचनाएँ

Author

रामदरश मिश्र

Year of Issue

1984

Publication Name

गिरिनार प्रकाशन

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हिन्दी उपन्यास के सौ वर्ष

Description

लाला श्रीनिवास दास के समय में हिन्दी उपन्यास का जो बिरवा रोपा गया था, वह आज एक विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है। प्रेमचंद, जैनेन्द्र, यशपाल, नागार्जुन, रांगेय- राधव, रेणु आदि महान प्रतिभाओं के संस्पर्श ने हिन्दी उपन्यास को न केवल समृद्ध किया है अपितु उसे अपनी जमीन से जुड़ी हुई, 'केन्द्रीय विधा' का सम्मान भी प्राप्त कराया है। हिन्दी उपन्यास की शतक यात्रा का गंभीर विवेचन और मूल्यांकन करने वाला वह ग्रन्थ एक सहयोगी प्रयास है। हिन्दी कथालोचन से जुड़े वरिष्ठ और प्रौढ़ समालोचकों ने हिन्दी उपन्यास की विभिन्न प्रवृत्तियों को रेखांकित करते हुए इसकी उपलब्धि और सीमा का समुचित आकलन किया है। इसमें संभवतः पहली बार हिन्दी के प्रतिनिधि उपन्यासकारों का विशद और तलस्पर्शी मूल्यांकन हुआ है। समूचे हिन्दी उपन्यास के स्वभाव, शक्ति और सीमा को समग्रतः आंकने की एक ईमानदार कोशिश के रूप में यह ग्रंथ अपनी अलग पहचान रखता है।