रामदरश मिश्र का यह तीसरा गजल संग्रह है | जिसमें भाषा और कथ्य दोनों में इतनी विविधता है की कोई कह ही
Author
रामदरश मिश्र
Year of Issue
2005
Publication Name
वाणी प्रकाशन
Link
View Link