दिनचर्या

रामदरश मिश्र की काव्य रचनाएँ

मिश्र जी की ककनी कला अत्यंत मजबूत है और समृद्ध भी जहाँ भाषा की कसावत है तो वहीं भावों का ए अजस्र सो|

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रामदरश मिश्र

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दिनचर्या

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मिश्र जी की ककनी कला अत्यंत मजबूत है और समृद्ध भी जहाँ भाषा की कसावत है तो वहीं भावों का ए अजस्र सोता भी उनकी कहानियों में लगातार बहता राहत हे और अपने पाठक को कहानी से बंधे राहत है | कोई भी उनकी कहानियों को पढ़ते हुए यह नाही कह सकता की यह कहानी मैं कल पढ़ूँगा जी भी कहानी को शुरू करता है फिर बिना कहानी खत्म किए नहीं रुकता |