'एक बचपन यह भी' एक छोटा-सा उपन्यास है जो बचपन के कुछ दृश्य और प्रसंग लेकर आया है। एक लड़की की संवेदना, खिलंदड़पन, ऊर्जा और मूल्य-दृष्टि तथा उसके प्रति पिता का पुत्रवत् प्यार और व्यवहार इसमें दीप्त है। यह बचपन सामान्यता से गुज़रता हुआ भी कुछ विशेष लक्षित हो रहा है। उपन्यास की नायिका चेतना अपने नाम को चरितार्थ करती लगती है। इसका कथा-शिल्प भी कुछ अलग-सा है। चेतना के बचपन के खंड-खंड प्रसंग, संवेदना और मूल्यबोध के अलग-अलग आयाम उसके चरित्र की छवियों को एक लय प्रदान करते हैं। इसमें एकता में अनेकता और अनेकता में एकता का सौन्दर्य व्याप्त है।