सवाल के सामने

रामदरश मिश्र की काव्य रचनाएँ

मिश्र जी की यह पुस्तक अपने भीतर अनेक प्रसंगों को समेटे हुए है|

Author

रामदरश मिश्र

Year of Issue

2000

Publication Name

भारत पुस्तक भंडार

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सवाल के सामने

Description

सवाल के सामने' में रामदरश मिश्र की वे कहानियां संगृहीत हैं जिनमें दलितों के जीवन की व्यथा-कथा है। मिश्र जी प्रगतिशील दृष्टि के मानववादी सर्जक हैं और उन्होंने अपने परिवेश में सवर्णों तथा उच्च-मध्य वर्गीय लोगों द्वारा दलितों पर होने वाले अत्याचारों का अनुभव किया है। यह अनुभव उन्हें उद्विग्न करता रहा है और उनका मानवीय सोच इन अनुभवों को ऐसी रचनाओं में रूपान्तरित करता रहा है जिनमें दलितों की यातना के साथ-साथ उनकी मनुष्यता और ऊर्जा के स्वर भी ध्वनित होते हैं। उन्होंने बार-बार सवर्णों और उच्च मध्य वर्गीय लोगों के अमानवीय व्यवहार तथा कुरूप सोच के चेहरे को बेनकाब किया है। दलित जहां अपने घोर अभावों तथा उच्च जातियों और वर्गों द्वारा किये गये सामाजिक, आर्थिक अत्याचारों से पीड़ित होकर यातना का जीवन व्यतीत कर रहे हैं वहीं उनमें अपने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के प्रति संघबद्ध चेतना जाग रही है और अत्याचारों के विरुद्ध प्रतिकार भाव का उदय हो रहा है। इन कहानियों में ये स्वर कहीं अलग अलग, कहीं एक साथ ध्वनित हैं।