थकी हुई सुबह मिश्र जी द्वारा रचित एक ऐसी कृति है जिसमे उन्होंने नारी जीवन के विभिन्न पक्षों को पाठकों के समक्ष रखने का प्रयास किया है । डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ “रामदरश कृत थकी हुई सुबह में नारी यातना के कई स्तर विश्वसनीयता के साथ खुलते हैं और नारी मुक्ति से सम्बद्ध कई सवालों को एक साथ जन्म दे डालते है”।