बाज़ार को निकले हैं लोग

रामदरश मिश्र की काव्य रचनाएँ

Author

रामदरश मिश्र

Year of Issue

1986

Publication Name

विकास पेपरबैक्स

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बाज़ार को निकले हैं लोग

Description

बाज़ार को निकले हैं लोग बेच के घर को 

क्या हो गया है जाने आज मेरे शहर को 

 

कितने हैं मेहरबान यहाँ के बहेलिये 

कहते हैं परिंदो से-'उड़ो' काट के पर को 

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