पड़ोस की खुशबू
पड़ोस की खुशबू
| Author | रामदरश मिश्र |
| Year of Issue | 1999 |
| Publication Name | नमन प्रकाशन |
| Link | https://www.amazon.com/Pados-Ki-Khushboo-Ramdrash-Mishra/dp/8187368098 |
Description
'पड़ोस की खुशबू' मिश्र जी के संस्मरणात्मक निबंधों का नया संग्रह है। इन संस्मरणों में कुछ यात्राओं से संबंधित हैं, कुछ व्यक्तियों से। देश हो या विदेश लेखक सर्वत्र पड़ोस की खुशबू का अनुभव करता है। लेखक की मानवीय दृष्टि सर्वत्र अनेकता में एकता की खोज करती है और उसे लगता है कि मूलभूत मनुष्यता के कारण अनेक देश, प्रदेश, शहर, गांव एक दूसरे के पड़ोसी हैं और उनसे प्यार की खुशबू फूट रही है। व्यक्तियों पर भी लिखे गये संस्मरणों में ऐसा लगता है कि हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में उसका समीपी पड़ोसी है उसके सुख-दुःख में शरीकता की खुशबू बिखेरता हुआ।
मिश्र जी के संस्मरणों में विवरण, कविता, कथा, निबंध सभी अपनी-अपनी छवियों के साथ एक दूसरे में आते जाते रहते हैं। इस प्रकार उनमें आद्योपांत बाहर और भीतर के, अनुभव के रस और वैचारिक प्रश्नों के संवाद चलते रहते हैं। साहित्यकार व्यक्तियों के व्यक्तित्वों की यात्रा करते हुए लेखक उनकी मूलभूत साहित्यिक छवियों से भी गुजरता है दोनों को आपस में जोड़कर उन्हें वर्तुल और सघन बनाता है। अतः मिश्र जी के संस्मरण एक चालू अर्थ में संस्मरण न होकर अपना अलग व्यक्तित्व निर्मित कर लेते हैं।