सरकंडे की कलम
Description
रामदरश मिश्र बहुमुखी प्रतिभा के लेखक हैं। इन्होंने साहित्य की कई विधाओं में महत्वपूर्ण रचनाएँ दी हैं। इनकी सृजन-यात्रा कविता से प्रारम्भ हुई और आज तक ये उसके साथ चल रहे हैं। इन्होंने अनेक शैलियों में काव्य-सृजन किया है। कविता के साथ चलते हुए छठे दशक में ये सहज भाव से कहानी-लेखन से जुड़े और धीरे-धीरे अनेक विशिष्ट कहानियों की रचना की। 1961 में इनका पहला विशिष्ट उपन्यास 'पानी के प्राचीर' आया। उसके बाद 'जल टूटता हुआ', 'अपने लोग', 'दूसरा घर' जैसे बड़े उपन्यास तो दिये ही, कई छोटे आकार के विशिष्ट उपन्यास भी दिये। मिश्र जी बीच-बीच में ललित निबंध भी लिख लेते थे किन्तु जीवन के परवर्ती काल में अनेक निबंधों की सृष्टि की। परवर्ती काल में ही ये डायरी, संस्मरण, यात्रावृत्त के लेखन से जुड़े। परवर्ती काल में ही 'सहचर है समय' नाम से इनकी आत्मकथा आई। आलोचना के क्षेत्र में भी इनका योगदान कम महत्व का नहीं हैं। 'सरकंडे की कलम' इनकी विविध विधाओं की महत्वपूर्ण रचनाओं का संचयन है। आशा है यह पुस्तक पाठकों को एक साथ मिश्र जी के समग्र लेखन के वैशिष्ट्य की पहचान करायेगी।