विदूषक
विदूषक
| Author | रामदरश मिश्र |
| Year of Issue | 2002 |
| Publication Name | इंद्रप्रस्थ प्रकाशन |
| Link | के- 71,कृष्ण नगर, दिल्ली-110051 |
Description
रामदरश मिश्र की कहानियां पीड़ा के मूल स्रोतों की खोज की कहानियां हैं। जीवन की किसी मामूली-सी घटना, प्रसंग, विचार या संवेदना में रामदरश मिश्र अपनी कहानी के लिए अपेक्षित सामग्री जुटाकर एक ऐसी दुनिया की रचना कर डालते हैं जो हमारे अनुभव और बोध के अधिक समीप होती है। हम जैसे दुबारा और अपेक्षाकृत अधिक सावधानी के साथ अपने खुद के अनुभव-जगत में प्रवेश करते हैं-अपनी दुनिया को और उस दुनिया के बीच खुद अपने-आपको एक नये ढंग से प्राप्त करने के लिए। वे चीजें जिन्हें अब तक हमने देखकर भी नहीं देखा था, वे स्थितियां जिनको लेकर हमारे अंदर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया पैदा नहीं हुई थी, वे समस्याएं और वे प्रश्न जिनकी चुभन हमने अब तक महसूस नहीं की थी, अचानक हमें उत्तेजित और आंदोलित करने लगते हैं। वस्तुतः अब तक की हमारी रंगहीन और आकारहीन दुनिया जो बेमेल और असंबद्ध किस्म की घटनाओं की उपस्थिति का अहसास भर जगाती थी, एक नई सार्थकता ग्रहण करने लगती है। एक घटना दूसरी घटना के साथ कार्य-कारण के संबंध से जुड़ी दिखाई देने लगती है, वह या तो किसी पूर्ववर्ती घटना का परिणाम होती है, या उसका कारण उसमें मानव-संकल्प, संवेदना, विचार और स्वप्न का संकेत मिलने लगता है।
- डॉ. महावीर सिंह चौहान