पराया शहर
पराया शहर
| Author | रामदरश मिश्र |
| Year of Issue | 2008 |
| Publication Name | हिमाचल बुक्स |
| Link | © लेखक प्रकाशक हिमाचल बुक्स ई-1/267, सोनिया विहार, दिल्ली-94 |
Description
रामदरश मिश्र मूलतः ग्राम-संवेदना के कथाकार है परंतु उन्होंने अपने ग्रामबोध को गाँव तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इसका विस्तार नगरों तक किया। प्रस्तुत संग्रह में 'सड़क', 'दूरियाँ', 'घर', 'आधुनिक', 'जमीन' शुद्ध गाँव से जुड़ी हैं, तो 'पराया शहर', 'एक वह', 'उत्सव', 'मिसफिट', 'पिंजड़ा' और 'संबंध' का परिवेश शहर है, किन्तु शहर के परिवेश में गाँव आ-जा रहा है। शहरी परिवेश की कहानियों में जो पात्र हैं, उनमे से अधिकांश गाँव के है अतः गाँव और शहर की स्थितियाँ और मन टकराते रहते हैं और द्वन्द्व-जन्य संश्लिष्ट संवेदना की सृष्टि होती रहती हैं। वास्तव मे रामदरश मिश्र की कहानियों से गुजरना एक व्यापक अनुभव-संसार से गुजरना है। उनमें एक चिर-परिचित जाना-बूझा संसार देखने को मिलता है। अतः ये कहानियाँ बहुत विश्वसनीय हैं। सवको अपनी सी लगती हैं। रामदरश मिश्र प्रगतिशील दृष्टि के रचनाकार हैं, अतः उनकी कहानियों में जन सामान्य के सुख-दुःख तो हैं ही उसकी पक्षधरता भी है। वे सदा अभिशप्त समाज के साथ खड़े दिखाई पड़ते हैं और उस व्यवस्था के क्रूर और कुरूप चेहरे को प्रत्यक्ष या प्रच्छन्न रूप में अनावृत करते हैं जो जन सामान्य की यातना के कारण होते हैं।